RBI Latest Update: भारत में आने वाले हैं प्लास्टिक के नोट! RBI ने दिया बड़ा अपडेट, जानिए कब होंगे लॉन्च
Plastic Notes India: भारत में जल्द पॉलिमर यानी प्लास्टिक आधारित नोटों की एंट्री हो सकती है। RBI ने बताया कि प्रस्ताव विचाराधीन है। जानिए ये नोट किस मैटेरियल से बनेंगे, इनके फायदे क्या हैं और दुनिया के किन देशों में पहले…

Polymer Notes India: भारत में जल्द ही नोटों का स्वरूप बदल सकता है। आने वाले समय में लोगों के हाथों में कागज की जगह पॉलिमर से बने नोट दिखाई दे सकते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने संकेत दिया है कि देश में पॉलिमर नोट शुरू करने का प्रस्ताव फिलहाल विचाराधीन है और इस पर शुरुआती स्तर पर अध्ययन किया जा रहा है।
हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है, लेकिन यदि यह योजना लागू होती है तो भारतीय करेंसी पहले से कहीं अधिक टिकाऊ और सुरक्षित हो सकती है।
RBI ने क्या कहा?
आरबीआई गवर्नर Sanjay Malhotra ने हाल ही में बताया कि पॉलिमर नोटों को लेकर केंद्रीय बैंक स्तर पर चर्चा चल रही है। फिलहाल यह योजना शुरुआती चरण में है और इसके विभिन्न पहलुओं का मूल्यांकन किया जा रहा है। RBI का कहना है कि जैसे ही इस संबंध में कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा, उसकी जानकारी सार्वजनिक रूप से साझा की जाएगी।
पहले भी हो चुका है परीक्षण
पॉलिमर नोटों को लेकर भारत में पहले भी प्रयास किए जा चुके हैं। वर्ष 2014 में सरकार ने संसद को बताया था कि 10 रुपये के पॉलिमर नोटों का परीक्षण कुछ चुनिंदा शहरों में किया जाएगा। इसके लिए कोच्चि, मैसूर, जयपुर, शिमला और भुवनेश्वर को चुना गया था।
हालांकि तकनीकी और परिचालन संबंधी चुनौतियों के कारण उस परियोजना को आगे नहीं बढ़ाया जा सका और बाद में इसे रोक दिया गया।
आखिर क्या होते हैं पॉलिमर नोट?
पॉलिमर नोट सामान्य कागजी नोटों की तरह नहीं होते। इन्हें विशेष प्रकार की पतली और लचीली प्लास्टिक फिल्म से तैयार किया जाता है। यही वजह है कि ये पारंपरिक नोटों की तुलना में अधिक मजबूत और लंबे समय तक चलने वाले होते हैं।
अगर ऐसे नोट गलती से पानी में भीग जाएं या कपड़ों के साथ वॉशिंग मशीन में धुल जाएं, तब भी इनके खराब होने की संभावना काफी कम रहती है।
किस मैटेरियल से बनते हैं ये नोट?
पॉलिमर नोटों के निर्माण में मुख्य रूप से BOPP (Biaxially Oriented Polypropylene) नामक विशेष सामग्री का उपयोग किया जाता है। यह एक उन्नत प्रकार की पॉलीप्रोपाइलीन फिल्म होती है, जो सामान्य प्लास्टिक से काफी अलग होती है।
यह फिल्म बेहद पतली, लचीली और टिकाऊ होती है। साथ ही इस पर विशेष कोटिंग की जाती है ताकि स्याही लंबे समय तक सुरक्षित रहे और नोटों की छपाई खराब न हो।
दुनिया के कई देशों में पहले से चल रहे हैं ये नोट
पॉलिमर नोटों की शुरुआत सबसे पहले Australia में हुई थी। इसके बाद United Kingdom, Canada, New Zealand और Singapore समेत कई देशों ने अपनी मुद्रा में इस तकनीक को अपनाया है।
इन देशों में पॉलिमर नोटों ने नकली नोटों पर रोक लगाने, नोटों की उम्र बढ़ाने और रखरखाव की लागत कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
क्या होंगे फायदे?
- कागजी नोटों की तुलना में ज्यादा टिकाऊ
- पानी से खराब होने की संभावना बेहद कम
- जल्दी नहीं फटते
- नकली नोट बनाना अधिक मुश्किल
- लंबे समय तक उपयोग योग्य
- नोट छापने की कुल लागत में कमी संभव
अगर RBI इस प्रस्ताव को मंजूरी देता है, तो आने वाले वर्षों में भारतीयों को नए डिजाइन और नई तकनीक वाले पॉलिमर नोट देखने को मिल सकते हैं।








