हरियाणा की 678 नहरों का होगा कायाकल्प, ₹5,700 करोड़ होंगे खर्च; सरकार ने जारी किए ये आदेश
Haryana Canal Project: हरियाणा में पानी की किल्लत से परेशान किसानों और लगातार गिर रहे जलस्तर की चिंता के बीच, सरकार ने राज्य की सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है। इस बड़ी परियोजना के…

चंडीगढ़: हरियाणा में सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने और जल प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य की बची हुई 678 नहरों का कायाकल्प किया जाएगा। इसके लिए करीब ₹5,700 करोड़ की लागत से ‘जल संरक्षित हरियाणा’ परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है।
इस परियोजना के तहत नहरों की मरम्मत, लाइनिंग, आधुनिकीकरण, जलभराव की समस्या का समाधान, भूजल रिचार्ज और माइक्रो इरिगेशन जैसी योजनाओं पर काम किया जाएगा। सरकार का दावा है कि इस प्रोजेक्ट से किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा मिलेगी और पानी की बर्बादी रोकने में मदद मिलेगी।
DPR तैयार करने के आदेश जारी
हरियाणा सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट यानी DPR तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभाग ने एजेंसियों से DPR और प्रस्तावित कार्यों की विस्तृत लागत का अनुमान तैयार करने के लिए आवेदन मांगे हैं।
DPR तैयार होने के बाद परियोजना के अलग-अलग कामों के लिए टेंडर जारी किए जाएंगे। इसके बाद नहरों के जीर्णोद्धार और जल प्रबंधन से जुड़े काम जमीन पर शुरू होंगे।
2026 से 2032 तक चलेगा प्रोजेक्ट
यह परियोजना वर्ष 2026 से 2032 तक लागू की जाएगी। इसका उद्देश्य हरियाणा की जल संरचना को आधुनिक बनाना है। योजना के तहत नहरों की मरम्मत के साथ-साथ ड्रेनेज नेटवर्क को मजबूत करने, जलभराव वाले क्षेत्रों में सुधार करने और भूजल रिचार्ज को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जाएगा।
हरियाणा में पिछले दो दशकों में बड़ी संख्या में नहरों और माइनरों का जीर्णोद्धार किया जा चुका है। अब सरकार का लक्ष्य बची हुई नहरों को भी आधुनिक बनाकर पूरे नहर नेटवर्क को मजबूत करना है।
678 नहरों का होगा जीर्णोद्धार
राज्य में कुल 1,570 नहरों में से बची हुई 678 नहरों को इस योजना के तहत बहाल किया जाएगा। इन नहरों को अगले पांच वर्षों में चरणबद्ध तरीके से सुधारा जाएगा।
योजना के अनुसार, कुछ नहरों का काम विश्व बैंक की सहायता से, कुछ का काम राज्य सरकार के बजट से और कुछ का काम नाबार्ड की मदद से पूरा किया जाएगा। इससे परियोजना के लिए अलग-अलग स्रोतों से वित्तीय व्यवस्था की जाएगी।
नहरों के साथ 1,961 माइनरों पर भी काम
इस योजना में केवल बड़ी नहरें ही नहीं, बल्कि नहर माइनरों को भी शामिल किया गया है। राज्य में 1,961 माइनरों के जीर्णोद्धार की योजना है। इससे खेतों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था और मजबूत होगी।
माइनरों की मरम्मत और आधुनिकीकरण से किसानों को अंतिम छोर तक सिंचाई का पानी मिल सकेगा। इससे खासतौर पर उन क्षेत्रों को लाभ होगा, जहां अभी पानी की उपलब्धता सीमित है।
माइक्रो इरिगेशन को मिलेगा बढ़ावा
परियोजना के तहत करीब 70,000 एकड़ क्षेत्र में माइक्रो इरिगेशन सिस्टम को बढ़ावा देने की योजना है। इसके लिए लगभग ₹900 करोड़ खर्च किए जाएंगे।
माइक्रो इरिगेशन से कम पानी में अधिक सिंचाई की सुविधा मिलती है। इससे पानी की बचत होगी और किसानों की सिंचाई लागत भी कम हो सकती है। सरकार पानी बचाने वाली खेती की तकनीकों को बढ़ावा देने पर भी फोकस कर रही है।
2 लाख एकड़ क्षेत्र में जलभराव से राहत
हरियाणा के कई इलाकों में जलभराव एक बड़ी समस्या है। इस परियोजना के तहत करीब 2 लाख एकड़ क्षेत्र में जलभराव की समस्या को दूर करने की योजना बनाई गई है।
इसके लिए ट्यूबवेल आधारित और सतही ड्रेनेज नेटवर्क को मजबूत किया जाएगा। इससे खेतों में जमा पानी की निकासी बेहतर होगी और किसानों को फसल नुकसान से राहत मिल सकती है।
दक्षिण हरियाणा में बनेंगे 80 नए जल निकाय
भूजल स्तर को सुधारने के लिए दक्षिण हरियाणा में करीब 80 नए जल निकाय बनाए जाएंगे। इनका उद्देश्य बारिश और अतिरिक्त पानी को संरक्षित कर भूजल रिचार्ज को बढ़ावा देना है।
दक्षिण हरियाणा के कई क्षेत्रों में पानी की कमी एक गंभीर चुनौती है। नए जल निकाय बनने से भूजल स्तर में सुधार आने की उम्मीद है और लंबे समय में पेयजल व सिंचाई दोनों जरूरतों को मदद मिल सकती है।
ट्रीटेड वेस्ट वाटर का होगा इस्तेमाल
परियोजना में उपचारित अपशिष्ट जल यानी ट्रीटेड वेस्ट वाटर के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया है। जींद, कैथल और गुरुग्राम के प्रमुख सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स से निकले उपचारित पानी का उपयोग सिंचाई में किया जाएगा।
इस योजना से करीब 28,000 एकड़ क्षेत्र में सिंचाई की जा सकेगी। इससे ताजा पानी की बचत होगी और किसानों को वैकल्पिक सिंचाई स्रोत उपलब्ध होगा।
किसानों को होगा सीधा फायदा
नहरों के आधुनिकीकरण से किसानों को समय पर और पर्याप्त सिंचाई पानी मिल सकेगा। खेतों तक पानी पहुंचाने की क्षमता बढ़ेगी और पानी की बर्बादी कम होगी।
इसके अलावा जलभराव वाले क्षेत्रों में सुधार से फसल उत्पादन में बढ़ोतरी हो सकती है। माइक्रो इरिगेशन और उपचारित पानी के इस्तेमाल से खेती को ज्यादा टिकाऊ बनाने में मदद मिलेगी।
फसल विविधीकरण को भी मिलेगा बढ़ावा
इस परियोजना के तहत पानी बचाने वाली खेती को प्रोत्साहन दिया जाएगा। फसल विविधीकरण, धान की सीधी बिजाई और जल-कुशल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने की योजना है।
हरियाणा में पानी की खपत को कम करने के लिए सरकार लंबे समय से फसल विविधीकरण पर जोर दे रही है। इस परियोजना से किसानों को कम पानी में बेहतर उत्पादन वाली खेती की ओर बढ़ने में मदद मिल सकती है।
अगले 25 साल के लिए मजबूत होगी सिंचाई व्यवस्था
सरकार का लक्ष्य है कि परियोजना पूरी होने के बाद हरियाणा का नहर नेटवर्क लंबे समय तक बेहतर स्थिति में काम करे। नहरों की लाइनिंग और आधुनिकीकरण से पानी का रिसाव कम होगा और सिंचाई क्षमता बढ़ेगी।
अनुमान है कि इस योजना से राज्य में सिंचाई कवरेज में भी बढ़ोतरी होगी और कई क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता पहले से बेहतर होगी।
फैक्ट शीट
| विवरण | आंकड़ा/स्थिति |
|---|---|
| परियोजना का नाम | जल संरक्षित हरियाणा / Water Secure Haryana |
| अनुमानित लागत | करीब ₹5,700 करोड़ |
| अवधि | 2026 से 2032 |
| मुख्य लक्ष्य | हरियाणा के जल ढांचे का आधुनिकीकरण |
| नहरों का जीर्णोद्धार | 678 नहरें |
| कुल नहरें | 1,570 |
| माइनरों का जीर्णोद्धार | 1,961 माइनर |
| माइक्रो इरिगेशन | करीब 70,000 एकड़ |
| माइक्रो इरिगेशन लागत | करीब ₹900 करोड़ |
| जलभराव समाधान | करीब 2 लाख एकड़ क्षेत्र |
| नए जल निकाय | दक्षिण हरियाणा में करीब 80 |
| ट्रीटेड वेस्ट वाटर से सिंचाई | करीब 28,000 एकड़ |
| प्रमुख फोकस | नहर सुधार, ड्रेनेज, भूजल रिचार्ज, पानी की बचत |
हरियाणा की 678 नहरों के कायाकल्प की यह योजना राज्य की सिंचाई व्यवस्था के लिए बड़ा बदलाव ला सकती है। ₹5,700 करोड़ की लागत से शुरू होने वाली इस परियोजना से नहरों का आधुनिकीकरण, जलभराव से राहत, भूजल रिचार्ज और पानी की बचत जैसे कई बड़े लक्ष्य पूरे किए जाएंगे।
अगर यह परियोजना समय पर पूरी होती है, तो किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा मिलेगी, पानी की बर्बादी घटेगी और हरियाणा को जल-सुरक्षित राज्य बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी।








